ROI BOHAT YATEEM SAKINA NASHEB ME | Abbas Ali Arfi Noha 2024 | Sham e Ghareeba Noha 2024 | 10 Muharram Noha 2024 Recite Sur E Fateha:- Haji Hasan Abbas Ibne Haji Akhtar Hussain
lyrics:-
सुनसान बन वो रात, वो उठता हुआ धुआँ
निकली पदर को ढूँढ़ने नन्हीं सी एक जान
कहती थी, “बाबा जान, बता दो के हो कहाँ?”
एक लाश बोल उठी, “मेरी बेटी, मैं हूँ यहाँ!”
लेकर इसी सदा का सहारा पहुँच गई,
रोते हुए नशेब में दुखिया पहुँच गई।
बेसर जब अपने बाप को देखा नशेब में,
रोई बहुत यतीम सकीना नशेब में।
(1)
मकतल में लाश बाप की जब सर कटी मिली,
थी उम्र चार साल की, बच्ची तड़प गई।
बेटी जब अपने बाप को पहचान न सकी,
आवाज़ दी, “या अबा!” की, यतीमा ने रोके दी।
लाशा ग़रीब बाप का बोला नशेब में।
(2)
लिखा है रावियों ने वो मंजर बड़ा अजीब,
जंगल, वो काली रात, वो ग़ुर्बत, वो ग़म-नसीब।
आवाज़ सुनके बाप की पहुँची है जब क़रीब,
हालत पदर की देख के रोई बहुत ग़रीब,
बेटी के साथ बाप भी रोया नशेब में।
(3)
आगे बढ़ी हुसैन की मजलूम ग़मज़दा,
तीरों से जिस्म बाप का देखा भरा हुआ।
घबरा के तीर जिस्म से करने लगी जुदा,
कमसिन थी, कोई तीर ना उस से निकल सका।
पाया न जब हुसैन का सीना नशेब में।
(4)
ख़ाली न पाई जिस्म पे तीरों से कोई जा,
करने लगी तवाफ़ वो बाबा की लाश का।
मायूस होके बैठी, बैठी वो ग़मज़दा,
रुख़सार अपना बाप के तलवों पे रख दिया।
लेकर पदर के पाँव का बोसा नशेब में।
(5)
अपने पदर की लाश पे ले ले के सिस्कियाँ,
वो अपना दर्द बाब से करने लगी बयां।
रुख़ पर बनी थी साफ़ जो ज़ालिम की उंगलियाँ,
बच्ची ने जब दिखाए तमाचों के वो निशां।
ज़ख़्मी बदन हुसैन का तड़पा नशेब में।
फिर ये कहने लगी रो-रो के यतीमा, “बाबा…
मेरे बालों को सितमगर ने जो पकड़ा बाबा।
मारा ज़ालिम ने मुझे ऐसा तमाचा बाबा,
छा गया मेरी निगाहों में अंधेरा बाबा!”
(6)
कहती थी, “मैं यतीमी हूँ, मुझ पर न वार कर!
की मिन्नतें बहुत की, ज़रा इंतज़ार कर।
मैं दे रही थी शिम्र को बुंदे उतार कर,
छीने हैं बेरहम ने मगर मुझको मार कर।”
ये दर्द जब पदर को सुनाया नशेब में।
(7)
वाइज़ लिखेगा कौन यतीमा की बेबसी?
लाशे शहे-ज़मां से वो जिस दम जुदा हुई।
लगता था अब जिएगी न बच्ची हुसैन की,
जाने लगी नशेब से जब शाह की लाडली।
बाबा को अपने छोड़ के तन्हा नशेब में।
Sunsaan ban wo raat wo uthta huwa dhuwan
Nikli padar ko dhoondne nanhi si ek Jan
Kahti thi baba Jaan batado ke ho kahan
Ek laash bol uthi meri beti main hun yahan
Lekar isi sada ka sahara paoch gai Rote huwe nasheb me dukhya pahoch gai
Besar jab apne baap ko dekha nasheb me Roi bahot yateem sakeena nasheb me
